Wednesday, 17 October 2018

आचार संहिता में बदले श्रीनगर ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कलक्टर को भी नहीं दी जानकारी


नवीन वैष्णव @अजमेर Exclusive
राजस्थान में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लग गई है। आचार संहिता में भी अजमेर के स्वास्थ्य विभाग में बीसीएमओ स्तर के अधिकारी भी बदले जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को आदेश जारी कर बीसीएमओ का सम्पूर्ण चार्ज अन्य चिकित्साधिकारी को सौंपा गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ के के सोनी ने मंगलवार  16 अक्टूबर को श्रीनगर के ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का चार्ज डॉ अशोक कालरा से लेकर डॉ प्रफुल्ल को सौंपने के आदेश जारी किए। यह आदेश आचार संहिता में जारी किए जाने से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे आचार संहिता में जब सभी पद बदलने पर निर्वाचन की ओर से रोक लगाई है, ऐसे समय में पदभार क्यों दुसरे चिकित्साधिकारी को सौंपा गया। खास बात यह भी है कि जिला कलक्टर व निर्वाचन अधिकारी को भी इस आदेश को जारी करने से पहले अवगत तक नहीं करवाया गया।
नियमों के तहत है
सीएमएचओ डॉ के के सोनी ने कहा कि आचार संहिता लगी हुई है लेकिन उन्होंने कोई तबादला नहीं किया है। पूर्व में बीसीएमओ का पद रिक्त था जो गगवाना सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक कालरा को अतिरिक्त चार्ज दे रखा था। गगवाना भेजकर फाईलें हस्ताक्षर करवानी पडती थी। इससे परेशानी होती थी, इसलिए यह चार्ज श्रीनगर के ही चिकित्साधिकारी डॉ प्रफुल्ल को सौंप दिया है। उन्होंने भी माना कि जिला कलक्टर को इससे अवगत नहीं करवाया गया।
जांच के बाद कुछ कहना संभव
जिला कलक्टर आरती डोगरा से जब उक्त आदेश के संबंध में जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी आदेश की उन्हें जानकारी नहीं है। आज कार्यालय का अवकाश था तो जांच की प्रक्रिया नहीं हो सकी। गुरूवार को जांच की जाएगी और यदि खामी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
ये आदेश हुए थे जारी
निर्वाचन विभाग की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने आचार संहिता लगने के बाद यह आदेश जारी किए थे कि कोई भी तबादला नहीं होगा और यदि किसी का तबादला हो गया और उसने कार्यभार ग्रहण नहीं किया तो वह दुसरे स्थान पर पदभार ग्रहण भी नहीं करेगा। वहीं बुधवार को जिला कलक्टर आरती डोगरा ने मुख्यालय छोड़ने या कार्यमुक्त होने पर भी प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। यदि किसी को विशेष परिस्थिति में छोड़ना पड़े तो स्वीकृति जिला मुख्यालय पर जिला कलक्टर और उपखण्ड मुख्यालय पर उपखण्ड अधिकारी ही प्रदान करेंगे अन्य किसी के पास यह अधिकार नहीं रहेगा।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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17-10-2018
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Saturday, 13 October 2018

तीर्थ नगरी में नशे की खेप के साथ तस्कर गिरफ्तार, लाखों की कीमत का है नशे का सामान


चप्पल के सोल में छिपाकर लाई गई थी नशे की खेप
नवीन वैष्णव@ अजमेर
तीर्थ नगरी पुष्कर की थाना पुलिस को नशे की खेप की सप्लाई देने आए तस्कर को दबोचने में कामयाबी मिली है। तस्कर के कब्जे से लगभग 200 ग्राम नशीला पदार्थ जप्त किया गया है जिसकी कीमत लाखों में है।
पुष्कर थाने के उपनिरीक्षक भंवरराम डूकिया ने बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि मंदसौर का शातिर तस्कर पुष्कर में माल की डिलीवरी देने आ रहा है। इस पर उन्होंने जाल बिछाकर तस्कर को देवनगर रोड़ से दबोचा। उसे हिरासत में लेकर जब पूछताछ की गई तो उसने तीर्थनगरी में स्नान करने के लिए आना बताया। काफी समय तक वह पुलिस को गुमराह करता रहा। बाद में जब सख्ती से पूछताछ की तो उसने चप्पल के सोल में नशे का सामान छिपा होना कबूला। पुलिस की टीम ने जब चप्पल का सोल हटाया तो उसमें स्मैक और दो अन्य तरह के पाउडर मिले। डूकिया ने कहा कि तस्कर मंदसौर का रहने वाला 28 वर्षीय मंगल सुथार है। उसके कब्जे से 45 ग्राम स्मैक, 38 ग्राम सफेद और 98 ग्राम ब्राउन पाउडर जप्त किया गया है। इसकी कीमत लाखों में है। पकड़े गए तस्कर से माल की डिलीवरी लेने वाले और मुख्य तस्कर के बारे में पूछताछ की जा रही है।
तीर्थनगरी बनी नशे का ट्रांजिट पाइंट
पिछले कुछ सालों से तीर्थनगरी पुष्कर नशे का ट्रांजिट पाइंट बन गई है। यहां आने वाले विदेशी सैलानी नशे का सैवन करते हैं। इन्हें मनमांगे दामों पर नशा उपलब्ध करवाया जाता है। मोटा मुनाफा कमाने के लिए कई लोगों ने यह काम शुरू कर दिया है। विदेशियों को देखकर स्थानीय युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं जो कि खतरनाक है। पुलिस को चाहिए कि नशे की सप्लाई करने वाले स्थानीय लोगों पर भी कार्रवाई करे जिससे कि तीर्थनगरी के युवा नशे की लत से दुर रहे और यहां की पवित्रता भी बनी रहे।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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13-10-2018
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Monday, 1 October 2018

पुरूष नसबंदी हुई फेल तो पति ने पत्नी के चरित्र पर किया संदेह, चिकित्साधिकारियों पर भ्रूण हत्या के दबाव का आरोप

नवीन वैष्णव@ अजमेर
अजमेर शहर में रहने वाले दम्पति के जीवन में इन दिनों भूचाल सा आया हुआ है। दरअसल पति द्वारा करवाई गई नसबंदी किसी कारणवश फेल हो गई और पत्नी गर्भवती हो गई। इससे पति को पत्नी के चरित्र पर संदेह हुआ और बात बिगड़ती चली गई। अब दम्पति चिकित्साधिकारियों पर भ्रूण हत्या के लिए दबाव डालने का आरोप जड़ रहे हैं।
अजमेर निवासी सीमा (बदला हुआ नाम) जो कि सरकारी विभाग की कर्मचारी है। सीमा के पति रमेश (बदला हुआ नाम) ने 2 दिसम्बर 2016 को परिवार सेवा के जरिए नसबंदी करवाई। सब कुछ सही चल रहा था लेकिन लगभग चार माह पहले सीमा गर्भवती हो गई। इसके साथ ही इनके परिवार में बवण्डर खड़ा हो गया। रमेश और उसके परिजनों ने सीमा के चरित्र पर संदेह करना शुरू कर दिया। वहीं अपने स्तर पर इसकी जांच भी करवाई गई जिसमें भी उसके ऑपरेशन को सफल ही बताया गया। इससे रमेश का शक ओर गहरा गया। रमेश की मानें तो स्वास्थ्य संकुल में जाकर इसकी शिकायत दी और सभी जांचे भी प्रस्तुत की लेकिन वहां उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
कलक्टर के फोन पर दिखे गंभीर
सीमा ने बताया कि वह इन सबसे काफी डिप्रेशन में आ गई। उसने जिला कलक्टर आरती डोगरा को भी अपनी आपबीती सुनाई तो उनका दिल पसीजा और उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ के के सोनी को फोन करके मामला देखने की बात कही तब जाकर चिकित्साधिकारियों की नींद खुली। फिर उन्होंने खुद सरकारी वाहन तक भेज कर उनसे बात की। सीमा ने आरोप लगाते हुए कहा कि एडिशनल सीएमएचओ डॉ एस एस जोधा और सीएमएचओ के के सोनी उसे गर्भ गिरवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं, साथ ही उसे जुर्माना भी दिलवाने की बात कह रहे हैं।
बच्चे को देंगी जन्म
सीमा ने कहा कि जहां एक ओर सरकार भ्रूण हत्या को रोकने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रूपए खर्च कर रही है वहीं उनके केस में भ्रूण हत्या को चिकित्साधिकारी ही बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नसबंदी करने वाले डॉ भगवान सिंह गहलोत की गलती का ही खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। डॉ गहलोत के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए वह पूरे प्रयास करेंगे। वहीं जिस निजी अस्पताल में वह कार्यरत है, वहां भी धरना देंगे। सीमा ने कहा कि वह अब इस बच्चे को जन्म देंगी और खुद को सही साबित भी करेंगी। जिससे कि परिवार में उपजा विवाद शांत हो सके। सीमा ने जिला कलक्टर आरती डोगरा से डीएनए जांच करवाकर उसे सही साबित करवाने की मांग भी की है।
नकारे सभी आरोप
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ के के सोनी ने कहा कि महिला उनसे अब तक नहीं मिली है। वह डॉ एस एस जोधा से ही मिल रही है। महिला का पति उनके पास आकर एक बार मिला था लेकिन बाद में उसने कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए। डॉ सोनी ने कहा कि केस फेल हो सकते हैं और इसके केस में भी ऐसा ही हुआ है। दस्तावेज पूरे देने पर 30 हजार रूपए मुआवजे की राशि के लिए विभाग द्वारा कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रूण हत्या के लिए विभाग की ओर से दबाव नहीं डाला जा रहा। केस बिगड़ने पर यदि 4 सप्ताह तक का गर्भ होता है तो नियमानुसार पति-पत्नी की रजामंदी से इसे सरकारी चिकित्सकों द्वारा गिरवाया जा सकता है।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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01-10-2018
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Monday, 24 September 2018

पीडब्ल्यूडी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता और पांच ठेकेदारों के खिलाफ होगा मुकदमा दर्ज

भ्रष्ट एसीई महेन्द्र कुमार गुप्ता

मुख्यालय को भेजी गई एफआईआर, ठेकेदारों को भी माना दोषी
नवीन वैष्णव@ अजमेर
अजमेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के हत्थे चढ़े सार्वजनिक निर्माण विभाग के दिग्गज अधिकारी अतिरिक्त मुख्य अभियंता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। मामले में एसीबी ने रिश्वत देने वाले ठेकेदारों को भी आरोपी माना है।
अजमेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक कैलाशचन्द्र बिश्नोई ने बताया कि गत 18 सितम्बर को सार्वजनिक निर्माण विभाग के दिग्गज अधिकारी अतिरिक्त मुख्य अभियंता महेन्द्र कुमार गुप्ता को पांच लाख 25 हजार रूपए की बड़ी रकम के साथ उनकी निजी कार में पकड़ा था। उक्त राशि के संबंध में वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके थे। एसीबी ने जब जांच की तो सामने आया कि पांच अलग-अलग लिफाफों में गुप्ता ने विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों से रिश्वत ही ली थी जिसमें रकम के साथ एक नया मोबाईल भी शामिल था। उन्होंने कहा कि रिश्वत देना और लेना दोनों अपराध है, ऐसे में गुप्ता और ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर जयपुर स्थित एसीबी मुख्यालय भिजवाई गई है। स्वीकृति मिलते ही सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
जुलाई के बाद नहीं निकाली राशि
एसीबी एसपी बिश्नोई ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य अभियंता गुप्ता के बैंक खाते की जांच की गई तो यह सामने आया कि गुप्ता ने जुलाई के बाद अपने खाते से कोई राशि नहीं निकाली है। इससे साफ जाहिर होता है कि गुप्ता के पास मिली रकम रिश्वत की ही थी। गुप्ता से पूछताछ भी की गई लेकिन फिलहाल वह कुछ भी नहीं कबूल रहे। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद गुप्ता के सीज किए गए बैंक लॉकर्स व सम्पत्ति की भी जांच की जाएगी।
रिटायरमेंट से पहले जाएंगे जेल!
इसी माह एसीई गुप्ता का रिटायरमेंट भी बताया जा रहा है लेकिन गुप्ता रिटायरमेंट के दिन से पहले जेल भी पहुंच सकते हैं। एसीबी भी पूरा प्रयास कर रही है कि मुख्यालय से अनुमति मिलते ही गुप्ता को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई अमल में लाए।
भूमिगत हुए ठेकेदार
पूर्व में जब गुप्ता को बड़ी रकम के साथ पकड़ा गया तो यह कयास लगाया जा रहा था कि किसी ठेकेदार ने ही रिश्वत लेने की सूचना एसीबी को दी है, लेकिन आज एसपी कैलाश चन्द्र बिश्नोई ने यह भी साफ कर दिया कि सूचना देने वाला ठेकेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों के खिलाफ आईपीसी की धारा 102 बी में तो एसीई गुप्ता के खिलाफ पीसी एक्ट की  धारा 8 और 13 व आईपीसी की 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
एसीबी की अपील
अजमेर एसीबी के मुखिया और भ्रष्टाचारियों के दुश्मन कैलाश चंद्र बिश्नोई ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी नुमाईंदा उनसे काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो वह सीधे उन्हें शिकायत दें। इसमें वह बिलकुल भी भयभीत ना हों। ऐसे घूसखोरां को वह सबक सिखा देंगे। जिससे कि कोई ओर घूस लेने से पहले सोचेगा और आम आदमी के काम बिना किसी रूकवाट के पूरे हो सकेंगे।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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24-09-2018
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Wednesday, 12 September 2018

*आईएएएस पति की अय्याशी और मारपीट से दुखी होकर आईआरएस बिन्नी शर्मा ने की थी खुदकुशी*



*वृद्ध पिता न्याय के लिए काट रहा पुलिस थाने के चक्कर*
नवीन वैष्णव@ अजमेर
जयपुर के राजस्व विभाग में कार्यरत आईआरएएस अधिकारी के मामले में अब तक पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मृतका का वृद्ध पिता न्याय की गुहार लेकर लगातार बजाज नगर थाने के चक्कर काट रहा है। मृतका के पति पर नाबालिग सहित अन्य से दुष्कर्म के भी संगीन आरोप जड़े हैं। वहीं पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देकर कार्रवाई नहीं करने की बात कही है। 
अजमेर निवासी चन्द्रमोहन शर्मा खुदकुशी करने वाली बिन्नी शर्मा के पिता हैं। शर्मा ने कहा कि गत 6 अगस्त को उसकी बेटी बिन्नी ने खुदकुशी की थी। इसकी नामजद रिपोर्ट और इसके जिम्मेदार बिन्नी के पति गुरप्रीत सिंह वालिया जो कि इंडियन अकाउंट सर्विस में है और चण्डीगढ़ में कार्यरत है, उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च पद पर होने के कारण गुरप्रीत सिंह और उसकी पत्नी रविन्द्र कौर के खिलाफ पुलिस एक्शन लेने से घबरा रही है। शर्मा ने कहा कि वह कार्रवाई की मांग को लेकर कई बार बजाज नगर थाना पुलिस से गुहार लगा चुके हैं लेकिन वहां कोई सुनवाई तक नहीं होती। 
*अय्याश है गुरप्रीत!*
चन्द्रमोहन शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी गुरप्रीत अय्याश किस्म का है। उसकी इन हरकतों से ही बिन्नी परेशान रहती थी। गुरप्रीत ने उनके घर में काम करने वाली 15 साल की नाबालिग के साथ भी कई बार दुष्कर्म किया वहीं उसके कई अन्य महिलाओं के साथ भी अवैध संबंध थे जिसकी सारी जानकारी बिन्नी ने अपनी डायरी में लिखी है। उक्त डायरी भी पुलिस को दे दी गई। उन्होंने कहा कि गुरप्रीत को जब भी गलत काम करने से बिन्नी रोकती तो वह बिन्नी व उसके दो मासूम बेटों के साथ मारपीट पर उतारू हो जाता था। इसके सीसीटीवी फुटेज भी उन्होंने उपलब्ध करवाए हैं। 
*नानी नानी के साथ रह रहे दोनों बेटे*
मृतका बिन्नी शर्मा के दो बेटे हैं। एक बेटा पहली कक्षा में पढ़ता है तो दुसरा अभी दो साल का ही है। दोनों अपनी मां बिन्नी को याद करके बेहद रोते हैं। दोनों बच्चों का पालन पोषण नाना-नानी ही कर रहे हैं। 
*हाईकोर्ट ने लगा रखी रोक*
इस पूरे मामले पर जब जयपुर शहर पूर्व के पुलिस उपायुक्त गौरव यादव से बात की तो उन्होंने कहा कि आरोपी भले ही कोई भी हो उसे बख्शा नहीं जाएगा। आरोपी गुरप्रीत वालिया ने हाईकोर्ट की शरण ले ली थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने आगामी तारीख तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक के आदेश दिए थे। ऐसे में गिरफ्तारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि शर्मा ने नाबालिग से दुष्कर्म के जो आरोप लगाए हैं। उस संबंध में पूर्व में भी नाबालिग के घर पुलिसकर्मियों को भेजा गया लेकिन पीड़िता की मां ने कोई कार्रवाई नहीं करने की बात कही। आज भी पुलिसकर्मियों को भेजकर उनसे रिपोर्ट देने के लिए समझाईश की गई है। रिपोर्ट आते ही इसका अलग से मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जाएगी। 
नवीन वैष्णव
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12-09-2018
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Monday, 10 September 2018

आनंदपाल का गुर्गा और जोर्डन हत्याकाण्ड का मुख्य आरोपी कालू गिरफ्तार




नवीन वैष्णव@ अजमेर
बीकानेर रेंज का आईजी बनते ही दिनेश एम एन ने फिर अपने चिर परिचित अंदाज में काम करना शुरू कर दिया है। वहीं उनके आने से रेंज के जिला पलिस कप्तान भी एक्टिव हो गए हैं और अपराधियों की धरपकड़ पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस बार रेंज की टीम ने दिनेश एम एन के निर्देशन में आनंदपाल के गुर्गे और बहुचर्चित जोर्डन हत्याकाण्ड के मुख्य आरोपी जगतपाल उर्फ कालू को उसके साथियों के साथ हथियार सहित दबोचने में सफलता प्राप्त की है।
श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने बताया कि आईजी दिनेश एम एन के निर्देश पर कुख्यात बदमाशों के लिए चुरू, हनुमानगढ एवं श्रीगंगानगर पुलिस की टीमों का गठन किया गया। इसी दौरान ईआरटी कमांडो सुरेश कस्वां को मुखबिर से सूचना मिली कि कुख्यात बदमाश जगतपाल अपने सहयोगियों के साथ हथियारों से लैस होकर डैकती की बडी योजना बना रहा है। इस पर टीम ने चूरू जिले के साहवा गांव स्थित गौरीशंकर सैनी के मकान की घेराबंदी करके दबिश दी। मकान में हनुमानगढ़ के मेघाना निवासी जगतपाल सिंह उर्फ कालू , हनुमानगढ़ निवासी जसविन्द्र, परलिका हनुमानगढ़ निवासी बलराम जाट, सोनड़ी हनुमानगढ़ निवासी विक्रम जाट और कृष्ण कुमार जाति जाट को गिरफ्तार किया गया। इन बदमाशों के कब्जे से एक 9 एमएम पिस्टल मय मैगजीन, 5 जिंदा कारतूस, एक पिस्टल 30 एमएम मय मैगजीन मय 10 जिंदा कारतूस, एक मैगजीन 30 एमएम मय जिंदा कारतूस, एक देशी कट्टा मय 3 जिंदा कारतूस, एक लोहे का कटर मय पाईप लगा सामान सहित अन्य वस्तुएं भी बरामद की है। यादव ने कहा कि पांचों मुलजिमों ने रात्रि में बडी डैकती की तैयारी एवं योजना बनाया जाना स्वीकार किया।
पांच हजार का था ईनाम
एसपी यादव ने कहा कि कुख्यात बदमाश जगतपाल सिंह उर्फ कालू पर 5 हजार का ईनाम घोषित किया गया था। कालू कई मामलों में वांछित चल रहा है। हाल ही में उसने सरदारशहर से एक आईटेन कार लूटी थी जो बरामद कर ली गई है। वहीं क्रेटा कार की लूट सहित कई अन्य मामलों में भी वह फरार चल रहा था। आरोपी कालू के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह से भी तार जुड़े हुए थे। वह आनंदपाल सिंह के लिए भी कई वारदातें कर चुका था। यादव ने बताया कि कालू के साथ पकड़े गए अन्य बदमाशों के खिलाफ भी कई संगीन मामले दर्ज हैं।
आईजी को आज मिली राहत
बीकानेर रेंज के मुखिया दिनेश एम एन को आज ही बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को स्थगित रखते हुए डीजी बंजारा, राजकुमार, दिनेश एम एन सहित अन्य को बरी कर दिया वहीं इसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी दिनेश एम एन को इसके लिए बधाई दी। वहीं प्रदेश भर से दिनेश एम एन को शुभकामनाएं मिल रही है। आपको बता दें कि दिनेश एम एन के खुद के इतने फोलोवर्स और शुभचिंतक हैं जितने कई राजनेताओं के नहीं है। सोशल मीडिया पर भी दिनेश एम एन छाए रहते हैं।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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10-09-2018
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Saturday, 8 September 2018

सरकार की वादाखिलाफी से सेवारत डॉक्टर्स खफा, 17 से आंदोलन की राह पर


नवीन वैष्णव अजेर
राजस्थान सरकार की वादाखिलाफी मरीजों के लिए फिर परेशानी बढ़ा सकती है। सेवारत डॉक्टर्स सरकार की वादाखिलाफी से खासे नाराज हैं। सेवारत डॉक्टर्स ने सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है। यदि सरकार नहीं चेतती तो एक बार फिर प्रदेशस्तरीय आंदोलन होगा।
अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने बताया कि लगभग नौ माह पहले राज्य सरकार के साथ हुए समझौते पर अब तक कोई अमल नहीं किया गया जिससे संघ के सभी सदस्यों में गहरा रोष व्याप्त है। सरकार हर बार सेवारत चिकित्सकों को केवल मात्र आश्वासन दे रही है जो कि गलत है। इन सबको लेकर संघ के सदस्यों की सहमति से यह निर्णय लिया गया है कि आगामी 17 सितम्बर से पुनः आंदोलन की राह पकड़ी जाएगी और इस बार आर-पार की लड़ाई शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सेवारत चिकित्सक कभी भी नहीं आंदोलन करना नहीं चाहता लेकिन यह सरकार उन्हें मजबूर कर रही है। चौधरी ने साफ कहा कि पूर्व में भी चिकित्सा मंत्री और मंत्री मण्डलीय उपसमिति से चर्चा की गई लेकिन इसके बाद भी चिकित्सकों की मांगे जस की तस बनी हुई है। चिकित्सकों को खासी परेशानियां भी उठानी पड़ रही है। सरकार अगर 17 सितम्बर तक उनकी मांगे नहीं मानती है तो संघ आंदोलन की राह पर जाएगा। इस बार तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा जब तक कि मांगे नहीं मान ली जाती।
दो बार हो चुकी है हड़ताल 
सेवारत चिकित्सक पूर्व में दो बार हड़ताल कर चुके हैं। नवम्बर माह में जहां 8 दिन की हड़ताल हुई थी वहीं दिसम्बर में लगातार 12 दिन की हड़ताल हुई थी। जिससे चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। मरीज बेहाल हो गए थे। इसके बाद सरकार ने वार्ता के लिए बुलवाकर जल्द मांगे पूरी करने का लिखित में भी दिया था। संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने कहा कि चिकित्सक लगभग 9 माह से सरकार की ओर मुंह ताक रहे हैं लेकिन सरकार है कि चिकित्सकों के सब्र का इंतहा ले रही है तो अब चिकित्सक भी पीछे हटने वाले नहीं है। अब मांगे मनवाकर ही दम लेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यदि हड़ताल होती है और मरीज परेशान होते हैं तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी ना कि चिकित्सक।
सरकार से अपील
राज्य सरकार को चाहिए कि जिन मांगों पर लिखित में सहमति दी गई है। उन्हें जल्द से जल्द पूरा करे। जिससे कि प्रदेश के मरीजों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़े। ऐसा ना हो कि फिर चिकित्सक बेमियादी हड़ताल पर चले जाएं और कुछ मरीजां को अपनी जान भी देनी पड़े।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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08-09-2018
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