Thursday, 30 August 2018

60 वर्षीय बुजुर्ग ने लिया संथारा, ढ़ाई घण्टे में छोड़ी देह


अजमेर के ब्यावर की ढ़ाबा गली में रहने वाले 60 वर्षीय बुजुर्ग महावीर चंद पोखरणा ने गुरूवार सुबह 9 बजे संथारा लिया । इसके ढ़ाई घण्टे बाद ही उन्होंने अपनी देह छोड़ दी।
ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ राष्ट्रीय मार्गदर्शक अशोक पारलेचा ने बताया कि टेलरिंग का काम करने वाले महावीर चंद पोखरणा को बोन कैंसर था। जिससे वह गत 8 सालों से परेशान चल रहे थे। इसी बीमारी के चलते उनका हाथ भी काटना पड़ गया था। पिछले कुछ दिनों से उन्हें अधिक ही शारीरिक पीड़ा हो रही थी। ऐसे में उन्होंने संथारा लेने की इच्छा जाहिर की। इस पर सुबह 9 बजे आचार्य ज्ञानचन्द्र जी म.सा. के मुखारविन्द से उन्हें संथारा दिलवाया गया। इसके ढ़ाई घण्टे बाद लगभग साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
वैकुण्ठी निकालकर किया जाएगा अंतिम संस्कार
अशोक पारलेचा ने कहा कि शुक्रवार दोपहर 2 बजे वैकुण्ठी निकाली जाएगी। जिसे शहर के विभिन्न रास्तों से ले जाया जाएगा। श्मशान स्थल पहुंचकर महाप्रयाण यात्रा सम्पन्न होगी। इसके बाद इनका बेटा कुशल पोखरणा इन्हें मुखाग्नि प्रदान करेगा। अंतिम संस्कार के समय बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहेंगे।
संथारा का विशेष महत्व
जैन समाज में संथारा का विशेष महत्व होता है। समाज के संत तो अपनी देह संथारा लेकर ही त्यागते हैं। संथारा लेने के पीछे मुख्य उद्देश्य आत्मा को पवित्र करना है। संथारा लेने के बाद अन्न जल त्याग दिया जाता है और केवल ईश्वर की आराधना की जाती है।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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30-08-2018
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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से शुरू हुई थी बैंक में घोटाले की शुरूआत


नवीन वैष्णव@ एक्सक्लूसिव न्यूज अजमेर
अजमेर की बैंक ऑफ बड़ौदा की रामगंज ब्रांच में हुए घोटाले की शुरूआत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से हुई थी। इसके लिए विभिन्न फर्जी व्यावसायिक फर्म भी खोली गई। वहीं घोटाले की जांच के लिए सीबीआई अधिकारी अजमेर भी पहुंचे और संबंधित बैंक कार्मिकों से पूछताछ भी की।
बैंक सूत्रों की मानें तो करोड़ों रूपए के घोटाले की शुरूआत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत मिलने वाले लोन से ही हुई। तत्कालीन बैंक मैनेजर ज्योति यादव ने इस योजना में कई लोन खोले। इसमें से कुछ फर्जी फर्म के आधार पर भी खोले गए जिनका आज भी कोई अस्तित्व नहीं है। इन फर्म की कुछ किश्तें तो भरी गई जिससे कि बैंक अधिकारियों को फर्जीवाड़े का अहसास ना हो।
मंसूबे पर फिरा पानी
बैंक सूत्र बता रहे हैं कि ज्योति यादव को जयपुर तबादला होने के बाद उसे निवारू रोड़ शाखा का इंचार्ज बना दिया गया। इस ब्रांच में भी उसने बैंक को चपत लगाने का मानस बनाया था लेकिन जागरूक अधिकारियों के कारण वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाई।
पंजाबी ने भी खोली कई फर्में 
जिस मूलचंद पंजाबी की फर्मों के नाम से 1 करोड़ 80 लाख का लोन जारी किया गया। उसी के नाम से कई अन्य फर्म भी खोली गई और उन पर लोन जारी हुआ। पूर्व में तो उनकी किश्तें भी समय से नहीं भरी गई। वहीं ज्योति यादव के रीलिव होने से पहले कुछ खातों में राशि जमा करके बंद करने की जानकारी भी बैंक सूत्रों ने दी है। पंजाबी के रिश्तेदार की मानें तो उसे भी पचास से अधिक लाख का चूना लगा कर गया है। पंजाबी ने अपने बेटे को पुना में अच्छा काम काज भी खुलवाया है।
बंद लोन अकाउंट फिर शुरू
बैंक ऑफ बड़ौदा के कई ग्राहकों के बंद लोन अकाउंट भी नए सिरे से शुरू हुए। शहर के ही रहने वाले एक वकील साहब ने बताया कि उनके बंद खाते में लाखों का ट्रांजेक्शन किया गया। जिस दिन रूपए जमा किए जाते, उसी दिन निकाल भी लिए जाते। इसकी जानकारी जब उन्हें मिली तो वह बैंक पहुंचे। बैंक के दस्तावेजों की जांच कर रहे अधिकारियों ने उन्हें उक्त एंट्रियां हटवाने का आश्वासन दिया। इसी तरह उनके एक परिचित की पत्नी के नाम से भी लोन अकाउंट खोल दिया गया। जब बैंक अधिकारियों ने लोन अकाउंट के बारे में बताया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बाद में बैंक अधिकारियों ने पूरी जांच के बाद अकाउंट बंद करने के लिए आश्वस्त किया।
जांच लगभग सम्पन्न
बैंक ऑफ बड़ौदा की डिप्टी जनरल मैनेजर सविता कैनी ने कहा कि बैंक ने अपने स्तर पर जो जांच कमेटी गठित की उसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। इसकी जांच रिपोर्ट आने के साथ ही सीबीआई को तथ्यों के साथ रिपोर्ट पेश की जाएगी, हालांकि सीबीआई को प्रकरण की जानकारी दे दी गई है। सीबीआई के अधिकारियों ने अजमेर के रीजनल ऑफिस पहुंचकर मामले के संबंध में पूछताछ भी की है। एक दो दिन में सीबीआई मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि अब तक साढे़ तीन करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आ चुका है। वास्तविक आंकड़े रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। कैनी ने साफ कहा कि जांच रिपोर्ट में जिस भी बैंक कार्मिक का घोटाले में हाथ होना सामने आया, उसे किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा।
बैंक अधिकारी ही दोषी
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से रिटायर्ड एजीएम नवीन मेघवाल ने बताया कि यदि किसी भी ग्राहक के दस्तावेज पर नियमों की अनदेखी कर लोन दिया गया है तो उसका दोषी बैंक अधिकारी को ही माना जाएगा। बैंक अधिकारी को इस संबंध में सारी जानकारी दी जाती है। इसके बावजूद यदि वह दे रहा है तो उसका निजी स्वार्थ ही माना जाएगा। जो न्यायिक कार्रवाई होगी वह बैंक अधिकारी के खिलाफ ही होगी।
नवीन वैष्णव
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अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट के दो आरोपियों की सजा स्थगित, कल आएंगे जेल से बाहर


नवीन वैष्णव@ अजमेर
अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में बम ब्लास्ट के दो आरोपियों की सजा को हाईकोर्ट ने स्थगित कर जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए हैं। जस्टिस मनीष भण्डारी की खण्डपीठ ने यह आदेश जारी किए।
एडवोकेट मनोज शर्मा और जे.एस. राणा ने हाईकोर्ट में दरगाह बम ब्लास्ट के आरोपी देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल के लिए जमानत याचिका दायर की थी। एडवोकेट राणा ने बताया कि उनके दोनों मुव्वकिलों के खिलाफ कोई सबूत नहीं थे, केवल मात्र संभावनाओं के आधार पर ही उन्हें दोषी करार दिया गया था। उन्होंने अदालत के समक्ष यह दरख्वास्त की कि भावेश पटेल का फोन 11 और 12 अक्टूबर को बंद था। केवल फोन बंद होने से ही यह नहीं माना जा सकता कि वह अजमेर आकर बम रखकर गया हो। इस दलील से न्यायाधीश संतुष्ट हुए। वहीं देवेन्द्र गुप्ता को लेकर दलील दी गई कि देवेन्द्र गुप्ता ने जो ड्राईविंग लाईसेंस बनवाया उसमें दलाल ने कूटरचित दस्तावेजों को काम में लिया। इसके आधार पर ही यह माना गया कि जो सिम दरगाह के पास से बरामद हुई वह देवेन्द्र गुप्ता के नाम से ली गई होगी जबकि ऐसा भी प्रमाणित नहीं हुआ। इन सभी दलीलों को सुनकर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों की सजा को स्थगित कर जमानत देने के आदेश जारी किए। राणा ने कहा कि दोनों आरोपी शुक्रवार को जेल से बाहर आएंगे।
मामला एक नजर
11 अक्टूबर 2007 को अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा साहब की दरगाह में बम ब्लास्ट किया गया था। जिसमें हैदराबाद निवासी तीन जायरीन की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे। इस मामले में चार आरोप पत्र पेश किए गए। इसके आधार पर 8 मार्च 2017 को सीबीआई कोर्ट ने भावेश पटेल, देवेन्द्र गुप्ता और सुनिल जोशी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया था। सुनिल जोशी की पूर्व में ही मृत्यु हो गई थी जबकि देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल को 2010 में गिरफ्तार कर लिया गया था।
नवीन वैष्णव
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Monday, 27 August 2018

लोन के नाम पर बैंक में करोड़ों का घोटाला, महिला ब्रांच मैनेजर सहित दो सस्पेंड

Jyoti Yadav


नवीन वैष्णव@ एक्सक्लूसिव न्यूज अजमेर
देश के बड़े घोटालेबाज विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और जतिन मेहता के बाद अब अजमेर में भी लोन के नाम पर घोटाला करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इसकी जानकारी मिलते ही बैंक प्रबंधन ने महिला ब्रांच मैनेजर और क्रेडिट ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया है।
मामला अजमेर के रामगंज स्थित बैंक ऑफ बड़ोदा ब्रांच का है। यहां पर गत दो साल से कार्यरत ब्रांच मैनेजर ज्योति यादव पर बिना डॉक्यूमेंटस के करोड़ों के लोन जारी करके बैंक को घाटा और खुद को फायदा पहुंचाने की जानकारी बैंक प्रबंधन को मिली। इसको देखते हुए बैंक की डिप्टी जनरल मैनेजर सविता कैनी ने तत्कालीन मैनेजर ज्योति यादव और क्रेडिट ऑफिसर प्रदीप को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
बैंक ऑफ बड़ोदा के रीजनल मैनेजर विमल नेगी ने बताया कि रामगंज ब्रांच के वर्तमान मैनेजर आशुतोष कुलदीप ने उन्हें करोड़ों रूपए का लोन बिना दस्तावेजों के खोलने की जानकारी दी। जब उन्होंने प्रथमदृष्टया जांच की तो पूर्व ब्रांच मैनेजर ज्योति यादव की खामी सामने आई। इसकी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई तो उन्होंने ज्योति यादव और तत्कालीन क्रेडिट ऑफिसर रहे प्रदीप को भी सस्पेंड कर दिया। नेगी ने कहा कि मामला सामने आने के बाद गहनता से सभी दस्तावेजों की जांच करवाई जा रही है।
सीबीआई की जानकारी में प्रकरण
रीजनल मैनेजर नेगी ने बताया कि उक्त मामले की जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सीबीआई को भी दे दी गई है। घोटाले का पूरा आंकलन होने के बाद सीबीआई इस मामले में मुकदमा दर्ज करेगी और आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी।
इस तरह हुआ घोटाला
रामगंज ब्रांच के वर्तमान मैनेजर आशुतोष कुलदीप ने बताया कि जून माह में पूर्व ब्रांच मैनेजर ज्योति यादव का तबादला जयपुर हुआ था। उसने रीलिव होने वाले दिन 1 करोड़ 80 लाख रूपए का लोन चन्द्रवरदाई नगर निवासी मूलचंद पंजाबी के नाम से जारी किया। जब उसने दस्तावेजों की जांच की तो यह खामी सामने आई। इस संबंध में जब ज्योति यादव से बात की तो उसने खुद के पास दस्तावेज होने और दस्तावेज पहुंचाने को कहा लेकिन उसके बाद से फोन बंद कर दिया। वहीं मूलचंद पंजाबी के घर पर जब पहुंचे तो वह भी वहां से गायब मिले और उनका फोन भी बंद मिला। आशुतोष कुलदीप ने यह भी कहा कि पूर्व में भी घोटाले होने के साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। अनिल बिश्नोई नामक एक व्यक्ति के खाते में भी बैंक से भारी मात्रा में राशि ट्रांस्फर की गई है।
कई अन्य खामियां भी आई सामने
बैंक प्रबंधन ने फिलहाल रामगंज ब्रांच में अलग से सीनियर ऑफिसर्स को जांच का जिम्मा सौंपा है। ऑफिसर्स की जांच में कई अन्य खामियां भी सामने आई है जो भी बैंक को घाटा पहुंचाने वाली है। इसमें से कुछ ऐसी है कि ग्राहक के पुराने लोन को पूरा करने के बाद भी दस्तावेज नहीं लौटाए गए और उस पर दुसरा लोन जारी कर दिया गया। वहीं कुछ में गलत जानकारी से बड़ी राशि का लोन स्वीकृत कर दिया गया।
गेहूं के साथ पिसा घून!
पूर्व मैनेजर ज्योति यादव की गलती तो हालांकि प्रथम दृष्टया बैंक प्रबंधन के सामने आ गई है और वह फरार भी हो गई, लेकिन क्रेडिट ऑफिसर प्रदीप के खिलाफ फिलहाल कोई भी सबूत नहीं मिले, ना ही उसके कहीं कोई हस्ताक्षर मिले हैं। इसके बावजूद प्रदीप को भी सस्पेंड किया गया है। वहीं ब्रांच में ऑपरेशन का काम देखने वाली बरखा का पासवर्ड भी ज्योति द्वारा घोटाले में काम में लेने की बात सामने आई है। ऐसे में बरखा का तबादला भी अन्य ब्रांच मे कर दिया गया है।
हाई फाई थी मैनेजर
रामगंज की पूर्व मैनेजर ज्योति यादव काफी हाई फाई तरीके से रहती थी। खुद को बड़े अधिकारी की बेटी बताती थी और बड़ी-बड़ी बातें भी करती थी। इससे हर कोई उसे ऊंची पहुंच वाली समझता था। ब्रांच का स्टॉफ तो मानों उसके आगे बोलने से पहले भी सोचता था। वहीं ग्राहकों से भी भिड़ने में जरा नहीं सोचती थी।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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27-08-2018
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Wednesday, 22 August 2018

दिवंगत पूर्व उपराज्यपाल गोविन्द सिंह गुर्जर के दत्तक पुत्र सुनिल गुर्जर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

सुनिल गुर्जर

सुनिल गुर्जर पर चचेरी बहन के पति से मर्सडिज कार के नाम पर 21 लाख रूपए हड़पने का है आरोप
नवीन वैष्णव@ अजमेर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दिवंगत पूर्व उपराज्यपाल गोविन्द सिंह गुर्जर के दत्तक पुत्र और नसीराबाद विधायक रामनारायण गुर्जर के पुत्र सुनिल गुर्जर पर जयपुर के वैशालीनगर थाने में धोखाधड़ी कर रूपए हड़पने का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा सुनिल गुर्जर की चचेरी बहन के पति सुरेन्द्र सिंह ने मर्सडिज कार के नाम पर 21 लाख रूपए हड़पने को लेकर करवाया है।
जयपुर निवासी परिवादी सुरेन्द्र सिंह ने वैशालीनगर थाने में शिकायत देकर बताया कि नसीराबाद निवासी सुनिल गुर्जर उसका रिश्ते में साला लगता है। वह पेशे से आईटी इंजीनियर है। सुनिल के सबल भारत संस्थान ट्रस्ट का आईटी का काम वही देखता था। इसी दौरान जनवरी 2017 में सुनिल गुर्जर ने अपनी मर्सडिज कार बेचने की मंशा बताई। उसे कार समझ में आ गई तो उसने रजामंदी जता दी। इसके बाद 21 लाख रूपए में सौदा तय हुआ। 1 लाख 10 हजार रूपए 31 जनवरी 2017 को नगद दिए गए जबकि अन्य फरवरी माह में देने का तकाजा हुआ। इसका इकरारनामा भी बनवाया गया। सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि सुनिल गुर्जर ने उसका लोन करवाने के लिए कार का ऑरिजनल रजिस्ट्रेशन, शपथ पत्र और फॉर्म 29 व 30 भी भरकर दिया। इसके आधार पर उसने कोटेक महिन्द्रा कम्पनी से अपना 19 लाख 90 हजार का लोन करवा लिया। लोन की राशि आने के बाद उसने सुनिल के कहे अनुसार 6 जनवरी को 2 लाख रूपए सुनिल गुर्जर के खाते में, 16 हजार 800 रूपए सबल भारत संस्थान ट्रस्ट, 7 फरवरी को गोविन्द सिंह गुर्जर ट्रस्ट में 3 लाख 40 हजार और 8 फरवरी को सुनिल गुर्जर के खाते में 10 लाख 84 हजार रूपए ऑनलाईन ट्रांस्फर किए। पूरी रकम ट्रांस्फर होने के बाद कार की डिलीवरी देने का वादा था लेकिन अब तक डिलीवरी नहीं दी।
खुले आम धमकियां
सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि सुनिल गुर्जर के जैविक पिता नसीराबाद विधायक रामनारायण गुर्जर के छोटे भाई प्रकाश गुर्जर का वह दामाद है। ऐसे में उसने कई बार आपस में ही मामला निपटाने और कार की डिलीवरी दिलवाने के लिए स्वयं रामनारायण गुर्जर और अन्य परिजनों से भी वार्तालाप किया लेकिन किसी ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। वहीं सुनिल गुर्जर उसे व उसकी पत्नी को धमकाने लगा कि वह कार नहीं देगा। उसकी राजनीतिक पहुंच है तो कोई भी कुछ नहीं कर सकता।
डेढ़ माह में मुकदमा
सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि जूलाई माह के प्रथम सप्ताह में उसने वैशालीनगर थाने में शिकायत दी थी। जिसे पहले तो परिवाद में रखा गया। थानाधिकारी ने स्वयं भी आपसी स्तर पर ही मामला निपटाने के लिए सुनिल गुर्जर को कहा लेकिन उसने एक नहीं सुनी। अब एसीपी के निर्देश पर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि उसे पुलिस पर पूरा भरोसा है कि उसे न्याय मिलेगा और सुनिल गुर्जर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
कई हैं पीड़ित
सुरेन्द्र सिंह की मानें तो कार के अलावा भी वह 10 से 12 लाख रूपए सुनिल गुर्जर से मांगता है। जिसका भी उसके पास पूरा रिकॉर्ड है। वहीं सुनिल ने उसके कई दोस्तों से भी रात्रि में ईमरजैंसी होने की बात कहकर लाखों रूपए लिए हैं जो आज दिन तक वापस नहीं लौटाए। इसी तरह कई ओर भी सुनिल के पीड़ित हैं। जिन्हें सुनिल ने लाखों का चूना लगाया है। ऐसे लोगों से ना तो सुनिल मिलता है और ना ही उनके फोन उठाता है। कोई सामने पड़ भी जाए तो उसे उलटा फंसाने की धमकी देकर भगा दिया जाता है।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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22-08-2018
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Monday, 13 August 2018

रिटायर्ड प्रधानाध्यापिका के घर लूट की वारदात का पर्दाफाश, सफेदपोश गिरफ्तार




यूपी के शूटर ने दी थी वारदात अंजाम
नवीन वैष्णव अजमेर
अजमेर के क्रिश्चयनगंज थाना क्षेत्र के गोकुल धाम में जून माह में रिटायर्ड प्रधानाध्यापिका के साथ हुई लूट की वारदात का जिला पुलिस कप्तान राजेश सिंह ने पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने बताया कि लूट की वारदात सफेदपोश लोगों के ईशारे पर की गई थी और इस वारदात को ईटावा के बदमाशों ने अंजाम दिया था।
जिला पुलिस कप्तान राजेश सिंह ने बताया कि क्रिश्चयनगंज थानाधिकारी धर्मवीर सिंह और स्पेशल पुलिस के इंचार्ज विजय सिंह रावत की टीम ने मेहनत करके दो माह पहले हुई वारदात को खोलने में सफलता प्राप्त की है। इसके लिए दोनों की टीम बधाई के पात्र हैं। उन्होंने पूरी टीम को सम्मानित करने की बात कही।
शिवसेना का उपजिलाप्रमुख है मुख्य आरोपी
क्रिश्चयनगंज थानाधिकारी धर्मवीर सिंह ने कहा कि वारदात का मुख्य आरोपी कुंदननगर निवासी मनोज यादव है। मनोज शिवसेना के युवा सेना का उप जिला प्रमुख है और अच्छे परिवार से संबंध रखता है। इसी तरह मनोज का जीजा लाली उर्फ संदीप रॉय और गोविन्द सिंह उर्फ लाला के परिवार में भी किसी तरह की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि मनोज और अन्य दोनों ने मिलकर ईटावा के बदमाश मौहम्मद ईसरार उर्फ मौहम्मद कल्लू से सम्पर्क साधकर वारदात को अंजाम देने की साजिश रजी। इसके बाद मौहम्मद कल्लू अपने दो साथियों के साथ 11 जून की रात आया और देशी कट्टे की नोक पर लाखों की नगदी व भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर लूटकर ले गए। मनोज व पकड़े गए दोनों आरोपी पुष्कर रोड़ स्थित निजी अस्पताल के पास ही इंतजार कर रहे थे। यहीं पर लूटे गए माल का बंटवारा भी हुआ। थानाधिकारी धर्मवीर ने कहा कि ईटावा के बदमाशों ने लूटे गए माल की नगदी को छिपा लिया और सोने के जेवरातों का बंटवारा कर लिया। उनकी मानें तो अधिकांश जेवरात भी ईटावा के बदमाश ही ले गए।
बदमाश बनना था सपना
थानाधिकारी धर्मवीर सिंह ने कहा कि मनोज यादव, लाली और लाला सभी सक्षम होते हुए भी लालच में पकड़कर यह वारदात करवाई। उन्होंने कहा कि मनोज यादव का सपना बदमाश बनने का था और शहर पर राज करने की भी उसकी मंशा थी। इसके चलते वह समय समय पर खुद को प्रदर्शित भी करता था।
बड़े-बड़े नेताओं के साथ भी है फोटो
वारदात के मुख्य आरोपी मनोज यादव के फोटो अजमेर शहर के ही नहीं बल्कि प्रदेश के बड़े-बड़े नेताओं के साथ फोटो है। हमेशा मोटी-मोटी सोने की चैनें और अंगुठियां पहनकर किसी बाहूबली की तरह मनोज यादव सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेता था। उसका हुलिया देखकर ही नेता भी उसे अपने पास बैठाना शान समझते थे।
विजय सिंह की मुख्य भूमिका
थानाधिकारी धर्मवीर सिंह ने कहा कि स्पेशल पुलिस के इंचार्ज विजय सिंह रावत की इस वारदात को खोलने में अह्म भूमिका रही। उन्होंने ही आरोपियों के संबंध में सूचना दी जबकि आरोपी तो निश्चिंत हो गए थे कि उनका कहीं नाम तक नहीं आया है। विजय सिंह ने कड़ी से कड़ी जोड़कर आरोपियों को थाने की टीम व स्पेशल टीम के साथ दबोचा। वहीं ईटावा के बदमाशों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।  कार्रवाई में स्पेशल टीम के एएसआई मनोज चौहान, रामनारायण चौधरी, हैडकॉन्सटेबल मनोहर सिंह, दुर्गेश सिंह, कॉन्सटेबल रतन सिंह, जोगेन्द्र सिंह, महिपाल सिंह, क्रिश्चयनगंज थाने से हैडकॉन्सटेबल भगवान सिंह, कॉन्सटेबल जगदीश, प्रभात मीणा, राकेश मीणा, राजकुमार और गिरीराज सिंह शामिल थे।
वारदात को माना था चैलेंज
इस वारदात को थानाधिकारी धर्मवीर सिंह ने भी चैलेंज माना और यहां रहते ही इस वारदात का खुलासा करके बदमाशों को बैरक के भीतर धकेल दिया। आगामी दिनों में धर्मवीर सिंह यहां से रिलीव भी होने जा रहे हैं। उनका तबादला नागौर हुआ है। उनके उज्जवल भविष्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना करूंगा और उनको यह सुझाव भी दुंगा कि पुलिस के नारे को बुलंद करें। आमजन को न्याय दिलवाना ही अपनी प्राथमिकता समझें। जैसे कार्य अजमेर पुलिस में किया, उससे भी अच्छा नागौर जिला पुलिस के लिए करें।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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13-08-2018
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Thursday, 9 August 2018

नगर निगम का जेईएन 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार





भाजपा पार्षद राजेन्द्र सिंह पंवार भी है मामले में आरोपी
नवीन वैष्णव अजमेर
अजमेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधीक्षक कैलाश चंद्र बिश्नोई ने भ्रष्टाचार मुक्त अजमेर अभियान चला रखा है। इसी के तहत नगर निगम के जेईएन को 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। वहीं निगम का वार्ड संख्या 4 का पार्षद राजेन्द्र सिंह पंवार भागने में कामयाब हो गया।
एसीबी एसपी कैलाश चंद्र बिश्नोई ने बताया कि फॉयसागर रोड़ निवासी मोहित सोनी ने ब्यूरो को शिकायत दी कि वह अपने मकान पर ही तीसरी मंजिल का निर्माण कार्य कर रहा है। स्थानीय भाजपा पार्षद राजेन्द्र सिंह पंवार उसके यहां आया और निर्माण कार्य को अवैध बताकर काम बंद करवाने की धमकी दी साथ ही भू तल पर चल रही डेयरी को भी बंद करवाने को कहा। इसके बाद भी जब पंवार को तवज्जो नहीं दी गई तो वह निगम के जेईएन राजेश मीणा को अपने साथ ले गया और काम रूकवाने का प्रयास किया। निर्माण कार्य करने के लिए पार्षद ने 50 हजार व जेईएन मीणा ने 25 हजार की डिमाण्ड की। बिश्नोई ने कहा कि शिकायत का सत्यापन करवाकर स्पेशल यूनिट इंचार्ज मदनदान सिंह को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
50 से कम नहीं चलेगा
एसीबी के स्पेशल यूनिट इंचार्ज मदनदान सिंह ने बताया कि इस मामले का मुख्य आरोपी वार्ड 4 का पार्षद राजेन्द्र सिंह पंवार ही है जो भाजपा से ही पार्षद है। पार्षद पंवार ने सोनी को साफ कहा था कि 50 हजार की राशि से एक रूपया भी कम नहीं चलेगा वहीं जेईएन 25 हजार में राजी हो गया। देर रात एसीबी ने जाल बिछाया। जेईएन ने अंधेरी गलियों में परिवादी मोहित सोनी को बुलाया और जैसे ही रकम ली उसे एसीबी की टीम ने दबोच लिया। उन्होंने कहा कि पार्षद को भी दबोचने का प्रयास किया गया लेकिन वह शातिर निकला और भागने में कामयाब हो गया। पार्षद के घर भी दबिश दी गई लेकिन वह वहां भी नहीं मिला। जल्द ही पार्षद पंवार भी गिरफ्त में होगा।
आरएसएस की स्कूल का पूर्व प्राचार्य
मामले का आरोपी पार्षद राजेन्द्र सिंह पंवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की आदर्श विद्या निकेतन स्कूल का प्राचार्य भी रह चुका है। इसके अलावा भी आरएसएस में कई पदों पर रहने की बात भी सामने आई है।
भाजपा बोर्ड पर दाग!
नगर निगम का भाजपा बोर्ड इस बार किसी ना किसी तरह सवालों के घेरे में ही रहा है। अब भाजपा के ही एक पार्षद के इस तरह खुले आम भ्रष्टाचार करने से बोर्ड पर ओर दाग सा लग गया है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं भी इस पार्टी से ही हैं और कहते हैं कि ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा। उन्हीं की पार्टी में गत दो दिन से लगातार जनप्रतिनिधि ही भ्रष्टाचार करते पाए गए हैं। ऐसे में पार्टी के आलाकमान क्या कहेंगे?
निगम में भ्रष्टाचार का जाल
नगर निगम में यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी तीन कार्रवाईयां हो चुकी है लेकिन यहां के अधिकारी व जनप्रतिनिधि इससे कोई सबक नहीं लेते। यदि एसीबी गहनता से यहां की पड़ताल करें तो भ्रष्टाचार की कई परतें खुल सकती है और सफेदपोशों के चेहरों से नकाब भी हटेंगे। आज शहर में जो अतिक्रमण हो रखे हैं या आवासीय भूखण्डों पर आलीशान होटलें या फिर व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बने हुए हैं। वह निगम के अधिकारियों से छुपे हों, ऐसा तो संभव ही नहीं। जब बनना शुरू होता है उसी समय सारा तय हो जाता है। यदि कोई शिकायत हो तो उसे भी टाल दिया जाता है। एसीबी के एसपी बिश्नोई जी और उनकी टीम को अब तक की कार्रवाई के लिए बहुत बधाई और शुभकामनाएं। एक सुझाव अवश्य दुंगा कि निगम में चल रहे भ्रष्टाचार के जाल को पूरी तहर समाप्त करवाएं जिससे कि अजमेर का विकास हो सके।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
9252958987, 9351087614
09-08-2018
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