Friday, 30 June 2017

ब्लाॅग पढ़कर महिला आयोग अध्यक्ष ने लिया प्रसंज्ञान

चिकित्सा मंत्री को निजी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश
गंज स्थित मलिक अस्पताल में अविवाहित युवती का अवैध रूप से गर्भपात करवाने के मामले में राज्य महिला आयोग ने प्रसंज्ञान ले लिया है। आयोग अध्यक्षा सुमन शर्मा ने चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ को निजी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और प्रदेश के अन्य निजी जनाना अस्पतालों की भी जांच करवाकर इस घिनौने काम को रूकवाने के निर्देश दिए हैं। शर्मा ने अपने अजमेर प्रवास के दौरान जिला कलक्टर गौरव गोयल को भी मामले में दिशा निर्देश दिए हैं। सुमन शर्मा ने शुक्रवार सुबह ब्लाॅग पढ़कर मैसेज किया कि वह इस गंभीर मामले को देख रहे हैं और इसके दोषियों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। बाद में फोन पर हुई वार्ता में शर्मा ने कहा कि ब्लाॅग पढ़ने के बाद उन्होंने चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ से बात की और अजमेर के मलिक अस्पताल में गौरखधंधा चलाने वालों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने और प्रदेश के सभी निजी जनाना अस्पतालों का भी रिकाॅर्ड खंगालकर जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कमेटी का गठन भी कर दिया गया है, कमेटी को जल्द से जल्द जांच करने के निर्देश प्रदान किए हैं।
कलक्टर भी करवाएंगे जांच
शर्मा ने कहा कि मामले में जिला कलक्टर गौरव गोयल से भी बात की गई और उन्हें अपने स्तर पर जांच करवाकर कार्रवाई करने के आदेश प्रदान किए हैं। शर्मा ने कहा कि ऐसे घिनौने काम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो जिससे कि भविष्य में ऐसे काम करने वालों पर अंकुश लग सके।
भ्रूण का हुआ पोस्टमार्टम
गंज थाना पुलिस ने भ्रूण का जेएलएन अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया और उसे दफना दिया गया। वहीं युवती का मेडिकल मुआयना भी करवाया गया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक मलिक दम्पति की तलाश भी की जा रही है। अस्पताल के स्टाॅफ के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार) अजमेर
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Thursday, 29 June 2017

हेलमेट होगा तो ही कर सकेंगे पुलिस लाईन में एन्ट्री

दुर्घटना में कमी लाने के लिए एसपी की अनूठी पहल
अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र सिंह चैधरी ने दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने इसके मद्देनजर अब पुलिस लाईन में आने और जाने वालों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता के निर्देश दिए हैं। हेलमेट नहीं होने पर वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मैंने पूर्व में ही ब्लाॅग के जरिए बताया था कि एसपी राजेन्द्र सिंह चैधरी हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा तकनीक पर काम करते हैं। चैधरी ने फिर यह सिद्ध कर दिया। उन्होंने नियम दुसरों पर थापने से पहले अपने स्टाॅफ पर लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सड़क हादसों में होने वाली मौतों में अधिकांश युवाओं की है और हेलमेट नहीं होने के कारण होने की बात आंकडे़ बता रहे हैं। दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए उन्होंने अपनी ओर से यह पहल करने की ठानी। एसपी चैधरी ने कहा कि पुलिसकर्मियों के बाद स्कूली बच्चों पर भी सख्ती दिखाई जाएगी। बच्चों को नियमित रूप से हेलमेट लगाकर वाहन चलाने के लिए बाध्य किया जाएगा। इसके लिए बच्चों के परिजनों को भी पाबंद किया जाएगा। इसके बाद शहर में भी हेलमेट लगाकर वाहन नहीं चलाने वालों के खिलाफ सख्ती दिखाई जाएगी। जिससे कि दुर्घटना में होने वाली मौतें कम हो।
सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त
जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र सिंह चैधरी ने गुरूवार को बाल वाहिनी स्थायी समिति की बैठक में निर्देश दिया कि किसी भी सूरत में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। दोषी पाए जाने के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने स्कूल प्रबंधन को भी रोड़ सेफ्टी क्लब गठित करने के निर्देश दिए साथ ही उन्होंने कहा कि 5 से 15 जुलाई तक यातायात संबंधी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें स्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा करवाई जाएगी। जो अच्छा प्रदर्शन करेगी उस स्कूल को पारितोषिक देकर सम्मानित भी किया जाएगा।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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मलिक हाॅस्पिटल में चल रहे गर्भपात के गौरखधंधे का भण्डाफोड़

अविवाहित युवती का किया जा रहा था गर्भपात
अजमेर के गंज स्थित मलिक हाॅस्पिटल में पिछले लम्बे समय से चल अवैध गर्भपात के गौरखधंधे का गुरूवार को भण्डाफोड़ हो गया। चिकित्सा विभाग की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई अंजाम दी। हाॅस्पिटल में शास्त्रीनगर निवासी अविवाहित युवती का गर्भपात किया गया था। पुलिस ने पांच माह के भ्रूण को कब्जे में लेकर जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। शुक्रवार को मेडिकल ज्यूरिस्ट से उसका पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।
कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ रामलाल चैधरी ने बताया कि मलिक हाॅस्पिटल में गर्भपात के गौरखधंधे की पिछले लम्बे समय से सूचना मिल रही थी। आज अविवाहित युवती के गर्भपात की सूचना मिलते ही चिकित्सा विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची लेकिन टीम की भनक लगते ही डाॅ राजेन्द्र मलिक और डाॅ साधना मलिक मौके से भाग छूटे। अस्पताल में केवल मात्र दो नर्सिंग स्टाॅफ मिले। डाॅ चैधरी ने कहा कि जब अस्पताल की जांच की गई तो लैबर रूम में भ्रूण पड़ा हुआ मिला। इस संबंध में जानकारी चाही गई तो अस्पतालकर्मियों ने गुमराह करने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया।
छिपाते रहे युवती को
डाॅ चैधरी ने बताया कि जिस युवती का गर्भपात किया गया था। उसे बचाने में अस्पतालकर्मी लगे रहे लेकिन जैसे ही गंज थाने की टीम वहां पहुंची और सख्ती से पूछा तो उन्होंने अस्पताल परिसर में ही लैटी हुई युवती के बारे में बताया। पुलिस ने युवती से भी इस संबंध में पूछताछ की।
मुकदमा दर्ज
कार्यवाहक थानाधिकारी नरेन्द्र सिंह ने बताया कि चिकित्सा विभाग की शिकायत पर मलिक हाॅस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ आईपीसी की धारा 315,318 और एमटीपी एक्ट की धारा 3 व 4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस हाॅस्पिटल संचालक की भी तलाश कर रही है वहीं युवती को जनाना अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। महिला चिकित्सक से उसकी जांच करवाई जाएगी।
गर्भपात की दवाईयां भी बरामद
चिकित्सा विभाग के ड्रग  इंस्पेक्टर भी मौके पर पहुंचे। ड्रग इंस्पेक्टर ने मौके से गर्भपात की दवाईयां भी जप्त की है। उक्त दवाईयों का कोई बिल भी बरामद नहीं हुआ। इस संबंध में भी डाॅ राजेन्द्र मलिक से पूछताछ की जाएगी और कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
सख्त हो कार्रवाई
गर्भपात जैसा घिनौना काम करने वालों के खिलाफ चिकित्सा विभाग और पुलिस को चाहिए की सख्त कदम उठाए। जिससे कि अवैध रूप से ऐसा काम करके मोटी रकम वसूलने वालों पर अंकुश लग सके। वर्तमान में भी शहर में कई मेडिकल स्टोर और निजी अस्पताल ऐसे हैं जो धडल्ले से यह घिनौना काम कर रहे हैं लेकिन आज दिन तक भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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Wednesday, 28 June 2017

आखिर प्रशासन को क्यों नहीं दिख रहे आनासागर झील पर हो रहे हादसे

आधा दर्जन से अधिक लोग गवां चुके हैं जान
आनासागर झील के रामप्रसाद घाट पर आए दिन हो रहे हादसों से प्रशासन बेखबर है। पिछले कुछ दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोग इसमें डूबकर अपनी जान गंवा चुके हैं। बुधवार सुबह जयपुर से ख्वाजा साहब की दरगाह में जियारत करने आए दो जायरीन की डूबने से मौत हो गई।
गोताखोर उस्मान की मानें तो अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से चैपाटी का निर्माण करवाया जा रहा है। निर्माण कार्य के चलते रामप्रसाद घाट की सीढ़ियों को तोड़ दिया गया। इससे यहां नहाने वाले जायरीन कच्ची मिट्टी के कारण फिसलने से डूब जाते हैं और मौत के मुंह में समां जाते हैं, जबकि कई लोगों को तो समय रहते बचा भी लिया जाता है।
एक को बचाने में गई दुसरे की जान
जयपुर निवासी अतीक कुरैशी अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ अजमेर के विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में जियारत के लिए आया था। जियारत के बाद सभी रामप्रसाद घाट पहुंचे जहां नहाने के दौरान रशीद कुरैशी डूबने लगा। उसे बचाने के प्रयास में अतीक ने भी पानी में छलांग लगा दी। कुछ ही देर में अतीक भी डूबने लगा। गोताखोरों की मदद से अतीक को निकलवाया गया तब तक वह दम तोड़ चुका था। वहीं उसके रशीद का शव काफी समय तक गोताखोर खोजते रहे। बाद में जाकर उसका शव मिला। इससे पहले शुक्रवार को हैदराबाद निवासी नाजिया अपनी डूबती मां रहीमा को बचाने में मौत के आगोश में समां गई। वहीं ईद पर भी एक जायरीन नहाने के दौरान डूब गया था जिसका शव मंगलवार को तैरता दिखाई देने पर निकाला गया।
जायरीन झील के पानी को मानते हैं पवित्र
जायरीन आनासागर झील के पानी को पवित्र मानते हैं और रामप्रसाद घाट पर आकर नहाते हैं। वहीं यहां के पानी को भी अपने साथ बोतलों में भर कर ले जाते हैं। अभी इन दिनों में रमजान माह के कारण जायरीन की आवक भी कम थी इसके बावजूद भी इतने हादसे हो चुके हैं। आने वाले दिनों में मोहर्रम आएगा जिसमें जायरीन की आवक बढ़ जाती है। उसमें हादसे ओर अधिक होंगे।
प्रशासन दे ध्यान
प्रशासन को चाहिए कि एडीए के काम में गति लाई जाए और यहां पर पहले की तरह लोहे की जंजीरें लगाकर गोताखोर भी तैनात किए जाए। जिससे कि यहां पर हादसे थम सके। नहीं तो इसी तरह झील रोजाना जान निगलती रहेगी और इसे मौत की झील माना जाएगा।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार) अजमेर
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Sunday, 25 June 2017

क्या अब भी बेटियां है अभिशाप?


इस जमाने में भी क्या बेटियों को अभिशाप माना जा सकता है। जवाब हालांकि ना में ही होगा लेकिन कुछ लोग आज भी बेटियों को अभिशाप मान रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण रविवार अलसुबह सरवाड़ थाना क्षेत्र के गणेशपुरा गांव में देखने को मिला। जहां एक दिन की नवजात बच्ची को कंटीली झाड़िंयों में मरने के लिए छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनकर जब जाकर देखा तो कांटों के बीच पड़ी मासूम नवजात रो रही थी और कांटों के कारण लहुलुहान हालत में थी। ग्रामीणों ने पुलिस को इसकी सूचना देकर उसे स्थानीय अस्पताल पहुंचाया जहां से उसे अजमेर के जेएलएन अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया। फिलहाल बच्ची की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। चिकित्सकों की मानें तो बच्ची चैबीस घंटे के अंदर पैदा हुई है।
दंगल जैसी फिल्म भी बेअसर!
बेटियां हर क्षेत्र में परचम फहरा रही है। भले ही वह बोर्ड कक्षा की परीक्षाओं का परिणाम हो या फिर सिविल सर्विसेज या अन्य कोई परीक्षा। बेटियों को बचाने के लिए सरकार भी पूरी कोशिश कर रही है लेकिन इसके बावजूद भी लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं आ पा रहा है और आए दिन नवजात बेटियों या फिर गर्भ में पल रही बेटियों के भ्रुण लावारिस मिलने की घटनाएं सामने आती है। फिल्म इंडस्ट्री या यूं कहें कि प्रसिद्ध फिल्म एक्टर आमिर खान ने भी बेटियों को अभिशाप मानने की परम्परा को तोड़ने के लिए दंगल जैसी फिल्म का निर्माण किया था लेकिन शायद अब भी लोगों के मन से बेटे-बेटी में फर्क नहीं निकल पा रहा है।
पुलिस करे सख्ती
अमूमन देखा जाता है कि कहीं भी नवजात या भ्रूण मिलने के बाद पुलिस की ओर से अज्ञात माता-पिता के विरूद्ध मुकदमा तो दर्ज कर लिया जाता है लेकिन आरोपियों का पता नहीं लग पाता। ऐसे में पुलिस को चाहिए कि गहनता से इसकी जांच करे और दोषियों को सजा दिलवाएं, जिससे कि लोग ऐसा कृत्य करने से कतराए।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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Friday, 9 June 2017

संभागीय आयुक्त आए आंख दिखाने, लिया अस्पताल का जायजा


अजमेर संभागीय आयुक्त हनुमान सहाय मीणा ने शुक्रवार को एक पंत दो काज वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया। मीणा अपनी आंखों की जांच करवाने के लिए जवाहर लाल नेहरू अस्पताल  पहुंचे। उन्होंने इस दौरान अस्पताल की व्यवस्थाएं भी देखी और अस्पताल अधीक्षक को सफाई व मरीजों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
अजमेर संभागीय आयुक्त हनुमान सहाय मीणा शुक्रवार को अचानक जेएलएन अस्पताल पहुंचे। उन्होंने यहां की व्यवस्थाएं देखी। डीसी मीणा ने आउटडोर, आपातकालीन विभाग सहित अन्य क्षेत्रों का जायजा लेकर सफाई पर विशेष ध्यान देने और मरीजों की सहूलियत के लिए पंखे लगवाने के लिए अस्पताल अधीक्षक डाॅ विनय कुमार मल्होत्रा को निर्देश दिए। दरअसल डीसी मीणा के आंखों में एलर्जी की शिकायत हो गई थी। इसकी जांच करवाने के लिए वह अस्पताल आए। यहां नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डाॅ राकेश पोरवाल ने उनकी आंखों की जांच की। डाॅ पोरवाल ने बताया कि संभागीय आयुक्त मीणा के आंखों में एलर्जी हो गई थी जिसकी जांच करने के बाद उन्हें नियमित दवा  डालने के लिए कहा गया है।
अन्य अधिकारी भी ले सीख
जिस तरह संभागीय आयुक्त मीणा ने सरकारी अस्पताल की सेवाओं में विश्वास जताया यह काबिले तारीफ है। उन्होंने स्वयं अस्पताल आकर आंखों की जांच करवाई। मीणा की इस पहल से अन्य अधिकारियों को भी सीख लेनी चाहिए और सरकारी सेवाओं में विश्वास रखना चाहिए। यदि अधिकारी स्वयं अस्पताल में आकर अपना ईलाज करवाएंगे तो अवश्य ही यहां की व्यवस्थाओं में ओर सुधार होगा साथ ही आमजन के मन में भी जो निजी चिकित्सालयों की परिपाटी बनती जा रही है, उसमें बदलाव हो सकेगा।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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आईपीएस मोनिका सैन को अदालत में किया तलब, आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी

बहुचर्चित रामकेश मीणा हत्याकाण्ड मामला
अजमेर के बहुचर्चित रामकेश मीणा हत्याकाण्ड में न्यायालय ने जांच अधिकारी आईपीएस मोनिका सैन को आरोपियों को लाभ पहुंचाने की बात कहते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। अगली सुनवाई पर आईपीएस सैन को स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश न्यायालय ने प्रदान किए हैं।
अजमेर के बहुचर्चित हत्याकाण्ड की शुक्रवार को अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण न्यायालय में सुनवाई हुई। इसमें न्यायाधीश बृजमाधुरी शर्मा ने कहा कि जांच अधिकारी आईपीएस मोनिका सैन ने आरोपियों को जान बूझकर लाभ पहुंचाने के लिए एससी एसटी की धारा नहीं जोड़ी और यही कारण रहा कि दो आरोपियों को जमानत पर रिहा भी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों आरोपी जमानत के काबिल नहीं थे लेकिन मोनिका सैन की लापरवाही के कारण दोनों को जमानत दी गई। विशिष्ट लोक अभियोजक पंकज जैन ने कहा कि न्यायाधीश शर्मा ने आईपीएस मोनिका सैन के कार्य को विधि के विरूद्ध मानते हुए आगामी तारीख पर स्वयं उपस्थित होकर लिखित में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं साथ ही दोनों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए हैं। वहीं आरोपीगण के वकील अजय वर्मा ने कहा कि न्यायाधीश ने जमानत पर छोड़े गए दो आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट नियम विरूद्ध जारी किए हैं। इसके लिए हाईकोर्ट की शरण ली जाएगी। उक्त मामले में जब आईपीएस मोनिका सैन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अनुसंधान के दौरान आरोपियों को आईपीसी की धारा 212 का मुल्जिम माना गया। ऐसे में उसकी अधिकतम सजा 5 साल होने के कारण एससी एसटी धारा नहीं जोड़ी गई। यदि दस साल से अधिक की सजा हो तो एससी एसटी की धारा स्वतः जोड़ दी जाती है।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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