Wednesday, 8 August 2018

बबीता नाम पर संकट! ब्यावर में भाजपा की सभापति पति और दलाल के साथ गिरफ्तार


एसीबी ने सवा दो लाख लेते रंगे हाथ दबोचा, सौ करोड़ के मॉल की स्वीकृति के लिए 78 लाख की दुकान ली
नवीन वैष्णव @अजमेर
अजमेर जिले के ब्यावर नगर परिषद की सभापति बबीता चौहान सवा दो लाख रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार की गई है। सभापति चौहान के पति नरेन्द्र चौहान और एक अन्य बिचौलिए को भी एसीबी ने दबोचा है। वहीं एसीबी ने एक अन्य मामला भी दर्ज किया है जिसमें सभापति बबीता चौहान और उसके पति नरेन्द्र ने बिचौलिए के जरिए मॉल के कन्वर्जन के लिए 50 लाख कीमत की दुकान की रजिस्ट्री भी करवाई थी।
अजमेर एसीबी के एसपी कैलाश चंद्र बिश्नोई ने बताया कि ब्यावर की सभापति बबीता चौहान के खिलाफ जमकर भ्रष्टाचार करने की शिकायतें मिल रही थी। इसके तहत इस पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान ब्यावर के कॉलेज रोड़ स्थित जैन फर्टिलिटी हॉस्पिटल के संचालक डॉ राजीव जैन ने सभापति चौहान के खिलाफ परिवाद पेश किया जिसमें बताया कि उसके आवासीय भूखण्ड को व्यावसायिक में रूपान्तरित करने के लिए फाईल लगाई तो नगर परिषद के बाबू जुंजार ने सभापति के घर जाकर मिलने की बात कही। जब वह सभापति चौहान व उसके पति से मिला तो भू रूपान्तरण के लिए सवा दो लाख रूपए की राशि की डिमाण्ड की तथा साथ ही चार-पांच दिन में रूपए देने को भी कहा। डॉ जैन की शिकायत का सत्यापन करवाकर आज सुबह लगभग सवा नौ बजे बबीता चौहान के घर पर ही रिश्वत की रकम भिजवाई गई। जैसे ही रकम चौहान ने प्राप्त की और जैन का ईशारा मिला। एसीबी की टीम ने धावा बोलकर चौहान दम्पति को दबोचना चाहा। ऐसे में दोनों ने शातिरपन दिखाते हुए शिवप्रसाद नामक व्यक्ति को रिश्वत की रकम लेकर भगाने का प्रयास भी किया लेकिन इसमें भी वह विफल रहे।
मनपसंद दुकान लूंगी
एसपी बिश्नोई ने बताया कि सभापति चौहान के खिलाफ ब्यावर नगर परिषद के पार्षद गुरूबच्चन सिंह ने एसीबी को शिकायत दी कि हॉस्पिटल मार्ग पर कॉम्पलैक्स की स्वीकृति के लिए फाईल लगाई जिसमें सभापति चौहान और उसका पति नरेन्द्र चौहान स्वीकृति के लिए कॉम्पलेक्स में मनपंसद दुकान की डिमांड कर रहे हैं। तय बातचीत के अनुसार शिकायतकर्ता गुरूबच्चन सिंह ने पार्षद चौहान के कहे अनुसार एक दुकान की रजिस्ट्री किसी बिचौलिए के नाम भी करवा दी। जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 78 लाख रूपए है। बिश्नोई ने कहा कि हालांकि नरेन्द्र चौहान ने दुकान की रजिस्ट्री सविता कांकाणी के नाम करवाई थी। इससे पहले शिकायतकर्ता से पांच लाख रूपए लेकर सविता के खाते में जमा करवाए गए और यही रकम शिकायतकर्ता के खाते में डाली गई जिससे कि स्पष्ट हो कि रूपए देकर दुकान ली गई है। 
प्रोपर्टी भी खोलेगी राज
भाजपा से जीतकर पार्षद बनी बबीता चौहान पर चुनाव प्रभारी व स्थानीय विधायक की मेहरबानी रही कि वह सभापति भी बना दी गई। सभापति बनने के बाद से ही बबीता चौहान के पति नरेन्द्र चौहान ने पूरा साम्राज्य जमा लिया और हर फाईल पर रूपए लेना शुरू कर दिया। कई तो ऐसे मामले भी हुए कि सड़क बनी नहीं और उसकी राशि भी स्वीकृत हो गई। सभापति चौहान को लेकर ना केवल कांग्रेस बल्कि भाजपा में भी रोष था लेकिन भाजपा के आला नेताओं का हाथ सिर पर होने के कारण इसका बाल भी बांका नहीं हो पाता। अब चौहान की प्रोपर्टी की जांच चल रही है जो भी कई राज खोलेगी। 
वो भी बबीता ये भी बबीता
जैसे ही सोशल मीडिया पर सभापति बबीता चौहान के ट्रेप की खबर प्रसारित हुई तो लोगों ने यह भी लिखा कि बबीता नामक की युवतियां और उनके पतियों के दिन अच्छे नहीं है। जहां मंगलवार को बबीता चौधरी अपने वकील पति के साथ धरी गई वहीं आज बुधवार को सभापति बबीता चौहान भी अपने पतिदेव के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार हुई।
कार्रवाई करने वाली टीम
भाजपा की भ्रष्टाचार सभापति बबीता चौहान के खिलाफ कार्रवाई एसपी कैलाशचंद्र बिश्नोई के नेतृत्व में की गई। इसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रप्रकाश शर्मा, डीएसपी महिपाल सिंह, सीआई इस्माईल खान, हैडकॉन्सटेबल कैलाश चारण, रामचन्द्र, रीडर राजेश शर्मा, कॉन्सटेबल भरत सिंह, युवराज सिंह, शिव सिंह, जीवनदान और किरण सिंह शामिल थे। पूरी टीम को महिला एवं बाल विकास विभाग के बाद बड़ी कार्रवाई करके भ्रष्टचारियों को जेल के सीखचां तक पहुंचाने का काम करने के लिए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। खास तौर से एसपी कैलाशचन्द्र बिश्नोई को बधाई  जो भ्रष्टचारियों को अपने नियत स्थान तक पहुंचाने के लिए अलर्ट रहते हैं। 
नागौर में पटवारी गिरफ्तार, यह भी ‘‘ब’’
अजमेर एसीबी की टीम ने एक दिन में ही दो कार्रवाई कर डाली। दुसरी कार्रवाई नागौर के खींवसर तहसली के तांतवास पटवार मण्डल में हुई। एसपी बिश्नोई ने बताया कि परिवादी भूरा राम ने टयूबबेल शिफ्टिंग के लिए पटवारी बस्तीराम से बात की तो उसने अवैध बताकर सीज करवाने की धमकी दी। ऐसा नहीं करने की एवज में दस हजार रूपए की डिमाण्ड की। बाद में 8 हजार रूपए में राजी हुआ। भूरा राम की शिकायत का सत्यापन करवाकर आज 8 हजार रूपए लेते बस्तीराम को रंगे हाथ ट्रेप किया गया। उक्त कार्रवाई डीएसपी जाकिर हुसैन और उनकी टीम ने अंजाम दी।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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08-08-2018
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Monday, 6 August 2018

आईआरएस अधिकारी ने फंदे में ढूंढा परेशानियों का अंत, आईएएस पति पर आरोप


नवीन वैष्णव@ अजमेर
जयपुर के राजस्व विभाग के जीएसटी विभाग में कार्यरत 35 वर्षीय महिला आईआरएस अधिकारी ने बीती देर रात फांसी के फंदे पर झूलकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पुलिस को सुसाईड नोट बरामद हुआ है जिसमें उसने पति और सास पर प्रताड़ित करने के आरोप जड़े हैं।
जयपुर शहर पूर्व के पुलिस उपायुक्त गौरव यादव ने बताया कि सोमवार रात्रि लगभग 12 बजे बजाज नगर स्थित एजी कॉलोनी में रहने वाली आईआरएस अधिकारी बिन्नी शर्मा द्वारा फांसी लगाने की सूचना मिली थी। इस पर रात्रि में ही पुलिस की टीम को मौके पर भेज दिया गया और एफएसएल से जांच करवाई गई। इसके बाद शव को जयपुरिया अस्पताल की मोर्चरी में शिफ्ट करवाया गया। उन्होंने कहा कि मौके से अंग्रेजी में लिखा एक सुसाईड नोट बरामद हुआ है जिसमें लिखा गया कि पति गुरमीत वालिया और उनकी मां ने खूब प्रताडित किया। इन दोनों ने उनका जीवन खराब कर दिया। इससे दुखी होकर ही वह यह कदम उठा रही है। उपायुक्त यादव ने कहा कि मृतका बिन्नी शर्मा के पति गुरमीत वालिया भी आईएएस अधिकारी हैं और चण्डीगढ़ में कार्यरत हैं।
मां के साथ रहती थी बिन्नी
यादव ने बताया कि मृतका बिन्नी अपनी मां और दो बच्चों के साथ यहां रहती थी। मिली जानकारी के अनुसार बिन्नी काफी समय से डिप्रेशन में भी रहती थी। पति और उसके बीच चल रही अनबन की बात भी प्रथम दृष्टया सामने आई है। पूरे मामले की जांच में पुलिस जुटी हुई है। यादव ने कहा कि बिन्नी शर्मा के पति आईएएस गुरमीत वालिया को सूचित कर दिया गया लेकिन अब तक वह जयपुर नहीं पहुंचे हैं।
क्या यही है आखिरी रास्ता?
इस घटनाक्रम के बाद फिर सवाल उठता है कि क्या खुदकुशी करना किसी समस्या का आखिरी उपाय है? ऐसा तो नहीं हो सकता लेकिन फिर भी मामूली से मामूली व्यक्ति से लेकर शीर्षस्थ पद पर बैठे लोगों द्वारा ही यह कदम उठाना अपने आप में सोचने पर मजबूर करता है। यह समस्या मामूली नहीं है। इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे कि लोगों के मन से आत्महत्या जैसे विचार बिलकुल ही निकल जाएं। एक अध्ययन के अनुसार डिप्रेशन का कारण कम होती आत्मीयता है। आज सोशल मीडिया या व्हॉटसएप सहित अन्य माध्यमों से तो हमसें हजारों लोग जुड़े हुए हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से कुछ ही लोगों से जुड़े रहते हैं। ऐसे दोस्त ही नहीं रखते जिनसे रोजाना मुलाकात करें या उनसे अपनी परेशानियां शेयर करें। जब परेशानियां बढ़ने लगती है तो व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है और उसे यह दुनिया बुरी लगने लगती है। वह सुसाईड की ओर ही अपने कदम बढ़ाता है। यदि उस समय कोई हो जो उसकी सुन सके और उसे समझा सके तो वह ऐसा नहीं करेगा।
इसलिए डिजिटल रूप से लोगों से जुड़े रहें लेकिन व्यक्तिगत रूप से भी लोगों के सम्पर्क में रहें और रोजाना कुछ समय ही सही ऐसे लोगों के साथ बिताएं। उनके साथ अपने मन के विचार और परेशानियां शेयर करें। शेयर करने से अवश्य ही समाधान निकलेंगे। जो बात आपको परेशान कर रही है, हो सकता है उसका समाधान आपका ही कोई मित्र निकाल सकें, तो शेयर करें और खुलकर जीएं।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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07-08-2018
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फ्रेंडशिप डे पर हुई तीन दोस्तों की मौत, आज एक साथ उठी अर्थियां


अजमेर के लामाना गांव में फ्रेंडशिप डे एक दर्द भरी याद छोड़ गया। दरअसल गांव के रहने वाले तीन दोस्त हाईवे पर खड़े थे। इसी दौरान तेज गति में आई पिक अप गाड़ी ने उन्हें कुचल दिया। इससे एक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो दोस्तों ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
मांगलियावास थाने की प्रशिक्षु थानाधिकारी सुमन मीणा ने बताया कि रविवार देर रात लामाना निवासी महादेव सिंह, हुकुम सिंह और नीरज हाईवे स्थित सलीम होटल पर खाना खाने आए थे। खाना खाने के बाद सभी हाईवे पर खडे़ होकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान काल बनकर आई पिक अप ने उनको टक्कर मार दी। इससे महादेव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि हुकुम सिंह और नीरज गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को जेएलएन अस्पताल भिजवाया जहां कुछ समय ईलाज के बाद ही दोनों को भी मृत घोषित कर दिया गया। मीणा ने कहा कि आज तीनों के शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है साथ ही पिक अप चालक के विरूद्ध लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है।
गांव में नहीं जले चुल्हे
एक ही गांव के तीन युवकों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर व्याप्त है। जब तीनों की अर्थियां उठी तो हर किसी की आंखे नम थी। बताया जा रहा है कि गांव में शोक के कारण ग्रामीणों के यहां चुल्हे तक नहीं जले। हर कोई मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने में जुटे हुए थे।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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एक करोड़ की लूट का पांच दिन में पर्दाफाश, 2 आरोपी गिरफ्तार



नवीन वैष्णव@ अजमेर
अजमेर संभाग के भीलवाड़ा जिला पुलिस ने गत 5 दिन पहले ट्रक ड्राईवर को बंधक बनाकर एक करोड़ रूपए की लूट को अंजाम देने वाले गिरोह का 5 दिन में पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार करके लूटा गया ट्रक व वारदात में प्रयुक्त कार भी जप्त कर ली है।
भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक डॉ रामेश्वर सिंह ने बताया कि गत 1 अगस्त को अलसुबह रायला थानाधिकारी महावीर सिंह को फोन पर सूचना मिली थी कि कुछ बदमाश ट्रक ड्राईवर से मारपीट करके उसे जंगल में पटक गए हैं। इसकी सूचना पर थानाधिकारी जंगल में पहुंचे और ट्रक ड्राईवर को अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलवाया साथ ही उसका मेडिकल मुआयना भी करवाया। पीड़ित ट्रक चालक हरियाणा के लोहिंगा निवासी तौफिक खान की रिपोर्ट पर बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद थानाधिकारी महावीर सिंह और साईबर टीम ने कड़ी मेहनत करके आरोपियों का सुराग लगाया और दो आरोपियों को दबोच भी लिया। उक्त गिरोह के सरगना और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
ट्रांस्पोर्ट से रैकी
रायला थानाधिकारी महावीर सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में माण्डलगढ़ थाना क्षेत्र के आरजिया निवासी आबिद और लुहारिया निवासी फारूख को गिरफ्तार किया गया। दोनां से कड़ी पूछताछ की गई और इनकी निशानदेही पर लूटा गया ट्रक और वारदात में प्रयुक्त वैनग आर कार को जप्त किया गया। आरोपियों ने कबूला कि ट्रक ड्राईवर जब भीलवाड़ा ट्रांस्पोर्ट नगर से 75 लाख रूपए से अधिक कीमत की कपड़े की गांठे भरकर दिल्ली के लिए रवाना हुआ। उसी समय उन्होंने लूट की वारदात अंजाम देने का प्लान बनाया। इसके बाद रायला थाने के आगे निकलते ही ट्रक में चढ़कर ड्राईवर को बांधकर पटक दिया और ट्रक को खुद के कब्जे में ले लिया। इसके बाद गिरोह के तीन साथी पीछे चल रही वैगन आर कार में ड्राईवर तौफिक की आंख पर पट्टी बांधकर वापस भीलवाड़ा के लिए रवाना हुए और बीच में ही ड्राईवर को जंगल में पटक गए। ऐसा करने के पीछे भी उनका मकसद पुलिस को गुमराह करना था। महावीर सिंह ने कहा कि आरोपियों ने ट्रक का माल कहां बेचा और गिरोह में अन्य कौन था। इसकी गहनता से जांच की जा रही है। जल्द ही गिरोह के सरगना सहित अन्य सदस्यों को दबोचा जाएगा और माल भी बरामद किया जाएगा। उन्होंने अंदेशा जताया कि इस गिरोह से हाईवे पर हुई कई लूट की वारदातें भी खुल सकती है।
नवीन वैष्णव
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Sunday, 5 August 2018

आरएएस प्री परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न, नेटबंदी ने किया परेशान


नवीन वैष्णव@ अजमेर
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी प्रारम्भिक परीक्षा 2018 का प्रदेश भर में आयोजन किया गया। इसमें कुल 75.80 फीसदी अभ्यर्थियों ने भाग लिया। किसी भी परीक्षा केन्द्र से कोई भी गड़बड़ी की खबर फिलहाल नहीं मिल सकी है। परीक्षा के सफल आयोजन के लिए आयोग के अध्यक्ष दीपक उप्रेती और सचिव पी सी बैरवाल की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है।
आयोग की ओर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार परीक्षा में सर्वाधिक अभ्यर्थियों की उपस्थिति संख्या टौंक में 85.90 रही जबकि सबसे कम उदयपुर में 60.21 रही। बात अगर अजमेर की करें तो यहां भी केवल मात्र 60.57 फीसदी परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा के दौरान काफी सख्ती देखी गई। जो नियम आयोग की ओर से निर्धारित किए गए थे। उन सभी नियमों की पालना करवाई गई। कई महिला अभ्यर्थियों के कुर्ते की बाहें काटने की भी खबरें प्रदेश भर से मिली।
रविवार और फिर नेटबंदी 
रविवार का दिन यानि अवकाश और फिर उपर से नेटबंदी की मार। मानों हर किसी को यह जमकर खली। सभी ने जिला प्रशासन और आयोग को कोसने में कहीं कमी नहीं छोड़ी। आमजन ही नहीं बल्कि राजपत्रित अधिकारियों ने भी नेटबंदी के निर्णय पर खासा रोष जताया। आपको बता दें कि एक ओर तो सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है वहीं दुसरी ओर नेटबंदी करके आमजन को हैरान कर रही है। इसके कारण डिजिटल ट्रांजेक्शन के साथ ही बच्चों की पढ़ाई  सहित नेट से जुड़े कई अन्य काम भी प्रभावित हुए।
निकालना चाहिए ओर उपाय
गृह विभाग को चाहिए कि हर परीक्षा में नेटबंदी करके लाखों लोगों को परेशान करने की बजाय कोई ओर उपाय निकालना चाहिए। राजस्थान पुलिस कॉन्सटेबल की परीक्षा से शुरू हुआ यह दंश ऐसा नहीं हो कि हर परीक्षा में आमजन को झेलना पड़े। नेटबंदी पर एक बोर्ड अधिकारी ने अच्छा तंज भी कसा था कि बोर्ड की परीक्षाओं में भी लाखों अभ्यर्थी बैठते हैं यदि बोर्ड भी यह परिपाटी शुरू कर दे तो कैसा रहेगा? विभाग को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नहीं थी उम्मीद
अभ्यर्थियां की प्रश्न पत्र को लेकर प्रतिक्रिया मिली जुली रही। कुछ ने प्रश्न पत्र को कठिन तो कुछ ने सरल बताया। वहीं अधिकांश अभ्यर्थियों का यही कहना रहा कि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि 5 अगस्त को उनकी परीक्षा हो सकेगी, लेकिन आयोग के अध्यक्ष दीपक उप्रेती ने पद संभालते ही जिस तरह की रणनीति बनाई, उसी का नतीजा है कि परीक्षा सही समय पर और शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो सकी।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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Saturday, 4 August 2018

आरएएस परीक्षा को लेकर अजमेर में रहेगा नेट बंद


नवीन वैष्णव @अजमेर
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी (प्रारम्भिक) परीक्षा 2018 का प्रदेश भर में आयोजन किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां को अंतिम रूप दे दिया गया है। परीक्षा के मद्देनजर कई जिलों में नेट बंद करने का निर्णय भी जिला प्रशासन की ओर से लिया गया है।
आरपीएससी की ओर से आयोजित आरएएस प्री परीक्षा के लिए पांच लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। रविवार को यह परीक्षा हजारों परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित होने जा रही है। परीक्षा को लेकर प्रदेश के जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। परीक्षा में किसी तरह की बाधा नहीं हो, इसके लिए कई जिलों में नेट भी बंद रहेगा।
जिले में यहां बंद रहेगा नेट
अजमेर जिला कलक्टर आरती डोगरा ने बताया कि संभागीय आयुक्त के आदेशानुसार अजमेर शहर, ब्यावर और किशनगढ़ में सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक नेट पूरी तरह बंद रखा जाएगा। इसकी पालना के लिए सभी मोबाईल ऑपरेटर्स को सूचित कर दिया गया है। ब्रॉडबेंड सेवाओं को इससे मुक्त रखा गया है। डोगरा ने कहा कि जिले में परीक्षा शांतिपूर्ण हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
जिला प्रशासन लें निर्णय
आयोग के सचिव पी. सी. बैरवाल ने बताया कि परीक्षा को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है। सभी परीक्षा केन्द्रों पर शांतिपूर्ण परीक्षा हो इसके लिए पुख्ता बंदोबस्त कर दिए गए हैं। नेटबंदी के सवाल पर बैरवाल ने कहा कि गृह विभाग को परीक्षा का आयोजन सफलतापूर्वक करवाने के लिए पत्र लिखा गया था। इसमें यह भी लिखा था कि जिला और संभाग स्तर पर यह निर्णय लिया जाए कि नेट बंद करना आवश्यक है या नहीं है। उनका उद्देश्य परीक्षा की गोपनीयता और कानून व्यवस्था को बनाए रखना है।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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Wednesday, 1 August 2018

सरकारी योजनाओं के पचास लाख रूपए प्रतिमाह हजम कर रहा था गिरोह


महिला उपनिदेशक सहित चारों आरोपी एक दिन के पीसी रिमाण्ड पर
अजमेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा नागौर जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में किए गए भण्डाफोड़ में पचास लाख रूपए हर महिने गिरोह द्वारा हजम करने की बात सामने आई है। बुधवार को महिला उपनिदेशक और तीन ठेकेदारों को एसीबी की विशेष अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें एक-एक दिन के पीसी रिमाण्ड पर सौंपा गया है।
अजमेर एसीबी के पुलिस अधीक्षक कैलाशचन्द्र बिश्नोई ने बताया कि मंगलवार को गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से जब गहन पूछताछ की गई तो सामने आया कि वह केवल पोषाहार में ही नहीं बल्कि विभाग की सभी परियोजनाओं में घपला कर रहे थे। हर माह लगभग पचास लाख रूपए की राशि महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक, अधिकारी-कर्मचारी और ठेकेदार हजम कर रहे थे। इसे हजम करने के लिए फर्जी स्वयं सहायता समूह भी खोले गए थे जो कि ठेकेदारों द्वारा ही संचालित किया जाता।
हरी सिंह है दुसरा उपनिदेशक
एसपी बिश्नोई ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदार हरी सिंह को विभाग का दुसरा उपनिदेशक कहा जाता था। वह पूरे विभाग को अपने अनुसार चलाता और विभाग के कार्मिकों को 25 प्रतिशत कमीशन बांट देता। जिससे कि कोई भी उसकी शिकायत नहीं करता। उन्होंने कहा कि अधिकांश बिल हरी सिंह के घर पर ही तैयार होते और विभाग का अधिकारी तुरंत उसे पास कर देता।
छह माह से सप्लाई नहीं
एसपी बिश्नोई की मानें तो कई ऐसे सेंटर्स भी है जहां पर पिछले छह माह में एक बार भी खाद्य सामग्री नहीं पहुंची। जिन लाभान्वितों को यह सामग्री मिलनी थी, उन्हें कोई बहाना बनाकर चलता कर दिया जाता था और उक्त सामग्री की रकम का 25 प्रतिशत विभाग और बाकि का ठेकेदार जीम जाते थे।
गर्भवती महिलाओं व बच्चों की भी योजनाएं
एसपी बिश्नोई ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में गर्भवती महिलाओं, 0 से 7 साल तक के बच्चों, आंगनबाड़ी पर आने वाले बच्चों के लिए विभिन्न परियोजनाएं चलाकर पोष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जाता है। नागौर में यह पूरा गिरोह इन वंचितों को लाभ पहुंचाने की बजाय खुद ही चांदी कूटने में लगा हुआ था। आज चारों को अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमाण्ड की मांग की गई लेकिन न्यायाधीश महोदय ने एक दिन का रिमाण्ड स्वीकृत किया। गुरूवार को पुनः रिमाण्ड मांगा जाएगा। बिश्नोई ने कहा कि विभाग के सीड़ीपीओ सहित कई अन्य लोग भी संदेह के दायरे में है जिनकी भूमिका सामने आते ही गिरफ्तारियां होंगी।
मंत्री जी का खास है ठेकेदार!
एसीबी के हत्थे चढ़े गिरोह में शामिल एक ठेकेदार राज्य सरकार के एक मंत्री जी का काफी नजदीकी बताया जा रहा है। फिलहाल एसीबी को मंत्री जी का मामले में हाथ होना सामने नहीं आया है। फिर भी बारिकी से इसकी जांच में स्वयं एसपी कैलाशचन्द्र बिश्नोई जुट गए हैं।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
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01-08-2018
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